गुलाम मानसिकता और हिंदी का ‘राजयोग’ …

  • श्याम रुद्र पाठक

हिंदी भारत के गुलामों की भाषा है | हिंदी कुली-कबाड़ियोंं और मजदूरोंं की भाषा है | कहने के लिए हिंदी भारत के केंद्र सरकार की राजभाषा है | परन्तु हिंदी का प्रयोग भारत के उच्चतम न्यायालय में प्रतिबंधित है | हिंदी का प्रयोग दिल्ली, झारखंड, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश और हरियाणा के उच्च न्यायालयों में प्रतिबंधित है | हिंदी का प्रयोग आईआईएम और NLU की प्रवेश परीक्षाओं CAT और CLAT में प्रतिबंधित है | हिंदी का प्रयोग UPSC की अधिकांश प्रतियोगिता परीक्षाओं में प्रतिबन्धित है | निम्न स्तर के कर्मचारियों के चयन के लिए एसएससी द्वारा आयोजित परीक्षाओं में अंग्रेज़ी भाषा का अधिभार 62.5 % तक है, जबकि हिंदी भाषा का अधिभार शून्य प्रतिशत है |

हे भारत के गुलामो ! तुम हो तो गुलाम, लेकिन आज़ाद होने के भ्रम में जीते हो | तुम गुलाम थे, गुलाम हो और गुलाम ही रहोगे | रहने दो यह सब तुम से नहीं हो पाएगा | तुम बिना कुछ किए हुए आजादी हासिल करना चाहते हो | क्या पिछले इकहत्तर साल में तुमने एक बार भी इस बात के लिए कोई आन्दोलन किया कि न्यायालयों और प्रतियोगिता परीक्षाओं में हिंदी के ऊपर लगा प्रतिबन्ध समाप्त हो ? नहीं | तुम्हें तो केवल मतलब है मंचों पर हिंदी के नाम पर सम्मान हासिल करने में | हिंदी के लिए लोहिया जी के समय जो आन्दोलन हुआ भी, उसका स्वरूप क्या था ? तुम अंग्रेज़ी के नाम पट्ट और साइन बोर्ड पर कालिख पोतते थे | अरे कालिख पोतने से क्या होगा ? अगर प्रतियोगिता परीक्षाओं में अंग्रेज़ी की अनिवार्यता रहेगी तो क्या हिंदी में पढ़ने वाले छात्र उच्च शिक्षा में प्रवेश कर सकेंगे या क्या वे नौकरियाँ हासिल कर सकेंगे ? कौन अभिभावक अपने बच्चों का इतना बड़ा दुश्मन होगा जो यह चाहेगा कि उसका बच्चा अंग्रेजी की बजाए हिंदी में पढ़े और विकास के अवसरों से वंचित रहकर कुली-कबाड़ी और मजदूर बनने के लिए मजबूर रहे ? लोहिया जी के अनेक चेले केन्द्रीय मंत्रिमंडल में अनेक साल तक रहे | परन्तु उन लोगों ने कभी भी प्रतियोगिता परीक्षाओं और न्यायालयों में अंग्रेज़ी की अनिवार्यता हटाकर भारतीय भाषाओं का विकल्प उपलब्ध करवाने की बात नहीं की | क्यों करें ? उनको तो अंग्रेज़ी के नाम-पट्ट और साइन-बोर्ड पर कालिख पोतने से मतलब था, सो पोत लिया |

हिंदी के नाम पर अलग-अलग सम्मेलनों में शेखी बघारने वाले लोग कभी भी विकास के अवसरों में अंग्रेज़ी की अनिवार्यता हटाने के लिए धरना-प्रदर्शन करने या जेल जाने के लिए तैयार नहीं होते | उन्हें तो मतलब है बंद हॉल में भाषण झारने और उसके लिए चन्दा इकट्ठा करने से |

रहने दो | यह सब तुम से नहीं हो पाएगा | तुम गुलाम थे, गुलाम हो और गुलाम ही रहोगे | कभी भी मृग खुद दौर कर सोए हुए सिंह के मुँह में नहीं आ जाता | तुम उसी भ्रम में जी रहे हो | अब तुम अपनी गुलामी क़ुबूल कर लो और हिंदी को लात मारो | अपने बच्चों को अंग्रेज़ी में पढ़ाओ |

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